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आज के मानवाधिकार नेटवर्क परिष्कृत, घने, और बहुमुखी हैं। परंतु, इन नेटवर्कों की गतिविधियों को आकार देने वाली बहसों तक पहुँच अभी भी भाषा, धन, विचारधारा, और सत्ता से प्रतिबंधित हैं।

यह रहा openGlobalRights, एक बहुभाषी, ऑनलाइन मंच जो सभी दृष्टिकोणों से मानव अधिकारों के काम पर बहस करने की ओर समर्पित है। हम नए और स्थापित लेखकों को बढ़ावा देते हैं, उन्नतिशील असहमतियों को उजागर करते हैं, विश्वभर के अधिवक्ताओं, पेशेवरों और विद्वानों के लेखों को प्रकाशित करते हैं।

हम वैश्विक दक्षिण के दृष्टिकोणों को उजागर करने के लिए विशेष प्रयास करते हैं, और सभी प्रकार के वैश्विक क्षेत्रों से बहस को प्रोत्साहित करते हैं।

हमारे लेख छोटे और पढ़ने योग्य होते हैं, परंतु इनमें अधिक जाँच-पड़ताल के लिए कई हाइपरलिंक उपस्थित रहते हैं।


दुष्मन के साथ काम करनाः दोषियों का सहयोग करने के फ़ायदे और नुकसान

मानवाधिकार कार्यकत्र्ता के सामने दोषियों के साथ काम करने का सबसे अच्छा तरीका कौन-सा हैघ् समझ के साथ-साथ ज़िम्मेदारी का भी ध्यान रखने के लिये नैतिक और नीति-संबंधी कारण हैं। EnglishEspañol

भारत में धर्मांतरण – मानव अधिकारों को आधार बनाना

धर्म केवल आस्था के बारे में नहीं होता है, बल्कि मानव कल्याण के लिए उसकी क्षमता के लिए भी होता है। यही कारण है कि अपने धार्मिक विकल्पों का मूल्यांकन करने के लिए एक व्यक्ति का अधिकार मानव अधिकारों पर आधारित होना चाहिए। English

भारत में मानव मलमूत्र हटाने के कार्य (मैनुअल स्केवेंजिंग) को समाप्त करने के लिए हिंदू धार्मिक नेताओं को बोलना पड़ेगा

दलित समुदायों द्वारा कच्चे सीवेज को एकत्रित करने की प्रथा के विरूद्ध भारत में हिंदू धार्मिक नेता प्रबलता से अभियान चलाने के लिए अनिच्छुक रहे हैं, और यही कारण इस प्रथा के उन्मूलन करने के प्रयासों की प्रगति को धीमी कर रहा है। openGlobalRights की बहस, धर्म और मानव अधिकार के लिए एक योगदान। English

भारत में रोम संविधि का आश्चर्यजनक प्रभाव

हालांकि भारत आईसीसी में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है,रोम संविधि कानून में उस सुधार को बढ़ावा देने में बहुत उपयोगी साबित हुई है जो हिंसा में राज्य सत्ता की सहभागिता के लिए दण्ड-मुक्ति के कई दशकों का अंत कर सकता है। English

अनुदान और नागरिक स्वतंत्रताएं

संस्थागत अनुदान पर निर्भरता ने भारत में अधिकतर मानवाधिकार कार्यों का काफ़ी हद तक ग़ैर-राजनीतिकरण, मुद्रीकृत और भ्रष्ट कर दिया है। हालांकि मानवाधिकारों के अनुदान पर सरकारी-नियंत्रण आपत्तिजनक है, तथािप अधिकारों के आंदोलन तभी चिरस्थायी और प्रभावी रहेंगे जब वे बड़े प्रायोजकों से स्वतंत्र होंगे।   अनंत गुरूस्वामीरवि नायर और  जेम्स रॉन और अर्चना पांडया के लेख पर एक प्रतिक्रिया। English.

मानवाधिकार संगठनों के लिए निधीकरण पर उसकी पकड़ के लिए भारत को चुनौती देने का समय

देश के सबसे जानकार मानव अधिकारों के विशेषज्ञों में से एक समझाते हैं कि उन मानवाधिकारों के कार्यों के लिए भारत किस तरह विदेशी अनुदान में रुकावट डालता है जिन्हें वह पसंद नहीं करता है। जनहितैषी उन कार्यों का समर्थन करने से बचते हैं जो सरकार को क्रोधित कर सकते हैं और इस कारणवश सबसे संवेदनशील मानवाधिकारों के मुद्दों से निपटने में सक्षम संगठन केवल वही हैं जो आम नागरिकों के छोटे-मोटे योगदान द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त करते हैं।  Englishالعربية, Español.

भारत की आधिकारों के लिए तथाकथित क्रांति

जैसे-जैसे भारत वैश्विक शासन में एक बड़ी भूमिका तलाश कर रहा है, वैसे-वैसे देश की खुद की समास्याएं बदतर होती जा रही हैं। सामाजिक सेवाओं के वितरण की ओर छोटे कदम उठाए जा रहे हैं, परंतु प्रयास यह प्रश्न पूछते हैं: एक अधिकार का क्या लाभ यदि अधिकार का लाभ प्राप्त नहीं किया जा सकता? मैथ्यू इडिकूला, मीनाक्षा गांगुली, असीम प्रकाश और राम मशरू को जवाब। English

क्या भारत मानव अधिकार में एक अंतरराष्ट्रीय लीडर बन सकता है?

बढ़ते श्रमिक समुदाय वाली एक उभरती अर्थव्यवस्था होने के नाते भारत यह मानता है कि वैश्विक मामलों में उसकी आवाज़ को सुना जाना चाहिए। इस बात से कोई भी असहमत नहीं है। परंतु, महत्वपूर्ण विदेशी नीतियों के मुद्दों पर भारत को ऐसी पहलकदमी करनी चाहिए जो मानव पीड़ा को समाप्त करने का प्रयत्न कर सकती हों।. EnglishEspañol中国语文  

एक वास्तविक जनसाधारण मानवाधिकार आंदोलन के लिए संघर्ष

अत्याधुनिक मानवाधिकार अभिज्ञता मतदान का प्रयोग करते हुए, लेखकों ने मेक्सिको, कोलंबिया, मोरोक्को और भारत में सामाजिक वर्ग और घरेलू मानव अधिकार आंदोलनों के बीच का संबंध तलाशा है। उन्हें यह पता चला कि आम लोगों के वर्ग की तुलना में सामाजिक कुलीन वर्ग मानव अधिकार के प्रतिनिधियों से बेहतर तरीके से जुड़ा है।. EnglishEspañolFrançaisالعربية中国语文हिंदीPortuguês, Türkçe

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